Table of Contents
Toggleकर्मचारियों के लिए ITR (income tax return) file करना जरूरी क्यों है?
income-tax-tips-for-employees-of-govt-of-rajasthan-income-tax
सभी कर्मचारी दिसंबर माह में अपनी इत्र को लेकर चिंता करनी शुरू कर देते हैं कि उन्हें आईटीआर फाइल करने से सबंधित किन-किन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है जिससे उन्हें भविष्य में कोई नोटिस पेनल्टी या किसी अन्य तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
इनकम टैक्स रिटर्न क्या है और इसे दाखिल करना इतना जरूरी क्यों है
एक कर्मचारी को पूरे साल की आय पर कुल कितना टैक्स देना होता है और कितने टैक्स की उसे छूट मिलती है इससे संधारित करने वाले दस्तावेज को इनकम टैक्स रिटर्न यानी इतर कहा जाता है कर्मचारियों के लिए आईटीआर फाइल करना बेहद जरूरी है क्योंकि यहकर्मचारियों के पूरे साल की आय का आधिकारिक आय प्रमाण पत्र होता है यह लोन वीजा और क्रेडिट कार्ड आदि लेने में मदद करता है और अगर कर्मचारी कर्मचारी का कार्यालय मैं ज्यादा टीडीएस काटा है तो उसे रिफंड मिलता है और भविष्य में इनकम टक्स के नोटिस से भी बचाव होता है
जिन कर्मचारियों की वार्षिक इनकम बेसिक एक्सेंप्शन लमिट से ज्यादा होती है या बैंक खाता मैं भारी लेनदेन होता है, विदेश यात्रा पर ज्यादा खर्चा, टीडीएस काटा हो चाहे इनकम कम हो हो तो ऐसी परिस्थितियों मैं कर्मचारियों को इत्र जरूर भरना चाहए. ताकि भविष्य किसी तरह की नोटिस या पेनल्टी ना लगे.
कर्मचारियों के लिए कौन सा form है सबसे बहतर
ITR 1 (sahaj)
जिन कर्मचारियों वार्षिक आय 50 लख रुपए तक है या आए सिर्फ सैलरी प्याज या एक घर के किराए से अर्जित है उनके लिए यह फॉर्म ITR-1 सहज सबसे बेहतर है
ITR-2
यह फॉर्म उन कर्मचारियों के लिए जिनके पास एक से अधिक मकान से अर्जित आए हो शेयर मार्केट म्युचुअल फंड से कैपिटल गैन कमाए हो या विदेशी संपत्ति या विदेशी कमाई हो. गलत आइटीआर फॉर्म भरने से आपका रिटर्न गलत दाखिल सकता है इसलिए सही आइटीआरफार्म का चुनाव करना बेहद जरूरी है.
आइटीआर फॉर्म कर्मचारी क फार्म 16 के आधार पर भरा जाता है फार्म 16 कर्मचारियों उनके नियोक्त विभाग के द्वारा जारी किया जता है.
फार्म 16 में क्या होता है
फार्म 16 म नियोक्ता के द्वारा आपको आपकी वार्षिक कमाई, कल कटे हए टैक्स 80C 80D जैसी छूट का विवरण दर्ज होता है. कर्मचारियों को फॉर्म 16 को फॉर्म 26as से मिलान करना जरूरी होता है और अगर दोनों में कोई फर्क हो तो उसे सही करना जरूरी है.
ITR नई टैक्स प्रणाली के हिसाब से भरे या परानी टैक्स प्रणाली के हिसाब से
पुरानी कर प्रणाली की खास बात
पुरानी कर प्रणाली में धारा 80d 80 के अधीन छूट मकान किराया भत्ता छूट यात्रा भत्ता की छूट होम लोन पर ब्याज और मूलधन म छूट और स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, यह tax regime उन लोगों के लिए बेहतर है जो होम लोन, मेडिकल इंश्योरेंस, ट्यूशन फीस आदि में छूट का फायदा उठाना चाहते हैं।
पुरानी कर प्रणाली के कुछ नुकसान भी हैं, इसमें आपको हर बार आयकर की जटिल गणना करनी होती है और इन्वेस्टमेनीभी करना होता है, जो बहुत ज्यादा बोझ बन सकता है।
नई कर प्रणाली (NEW tax regime)
इसमें बहुत सरल आयकर गणना होती है, किसी भी प्रकार के निवेश, होम लोन या इंश्योरेंस पर छूट का प्रावधान नहीं होता है, ये का प्रावधान नहीं हो ये कम कमाई वाले नए नौजवान युवाओं के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है।
क्या हर साल tax regime change कर सकते हैं?
जी हां। वेतन भोगी कर्मचारी हर साल नई और पुरानी टैक्स रेजीम में से किसी भी प्रणाली से ITR दाखिल कर सकते हैं। परन्तु इसके लिए आपको अपने नियोक्ता को पूर्व में सूचित करना बेहद जरूरी होता है।
NEW TAX REGIME SLAB
income 0-4.00 lacs tax -0
8.00-12.00 lacs. Tax 10%
12.0-16.0 lacs Tax 15%
16.0 -20.0 lacs. Tax 20%
20.0 -24.0 lacs tax 24%
24.0 lacs and above 30%
जिन कर्मचारियों का वार्षिक आय १२ लाख से कम है, वो इस व्यवस्था में शून्य tax भरते हुए रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
Old Tax regime slab
income 0-2.5 lacs. Tax 0%
2.5-5.0 lacs Tax 5%
5.0-10.0 lacs Tax 20%
10.0 – above. Tax 30%
old tax regime में छूट लेते हुए tax के बोझ को कम किया जा सकता है। इसमें धारा 80C 80D HRA LRA जैसे छूट लेकर टैक्स कम किया जा सकता है।
इस तरह आप अपने हिसाब से नैया पुरानी tax रेजीम चुन सकते हैं। हर साल नई या पुरानी प्रणाली जैसी आप चाहे। बस चुनाव करे समय पर। ताकि पेनल्टी से बच सके।
Understanding Income Tax for Government Employees







